आधुनिक भारत
आधुनिक भारत
इक्कीसवीं सदी का भारत पहले की तुलना में बहुत अलग है। आज भारत हर मामलों में विश्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। व्यापार-व्यवसाय से लेकर विज्ञान और खेलकूद के क्षेत्र में भारत विश्वभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है। नामी फर्म भारत में निवेश कर लाभ कमा रही है। भारतीय उद्योगों से निर्मित स्वदेशी वस्तुओं की मांग समूचे विश्व में बढ़ी है। हैण्डलूम एवं क्राॅफ्ट की वस्तुओं में भारतीय बाज़ार विशिष्ट पहचान रखते है। खादी के वस्त्रों चाह आज भी वैसी ही बनी हुई है जो महात्मा गांधी के समय थी। आधुनिक परिधानों में खादी को और भी अधिक फैशनबल बनाया गया है।
चिकित्सा-
स्वास्थ्य सेवाएं भी पहले से बेहतर हुई है। यहां तक की अच्छी और अन्य देशों से सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं से आकर्षित होकर विदेश में रहने वाले नागरीक भारत आकर उपचार करवाते है। भारतीय आयुर्वेद पहले से अधिक प्रसिद्ध है। आयुर्वेदिक दवाईयों का कारोबार कई गुना बढ़ा है। एम्स जैसे अत्याधुनिक हाॅस्पीटल पुरे भारत के विभिन्न शहरों में सेवायें दे रहे है। आज हमारे पास एक से बढ़कर एक डाॅक्टर्स की टीम है जो भारतीयों को स्वास्थ्य लाभार्भ चौबीसों घंटों काम कर रही है।
उद्योग-
आग और पहिए की खोज के क्रांतिकारी परिणाम समूचे भारत में देखे जाते है। भारी उद्योग से समृद्ध भारत समूचे देश को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को चरितार्थ करते हुये दिखाई देते है। ऑटोमोबाइल्स के क्षेत्र में भारत का विशेष स्थान है। हजारों की संख्या में प्रतिदिन मोटर गाड़यों का निर्माण जारी है। भारत निर्मित वाहनों की पूंछ परख विदेशों में बढ़ी है। भारत से बड़ी संख्या में वाहनों का निर्यात किया जाता है। आज भारत के कल कारखानों में सूई से लेकर तलवार अर्थात सबकुछ बनता है। भारत ने पहले की तुलना में आयात कम कर निर्यात को बढ़ाया है। जिससे लाखों बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। भारत में अब प्रतिवर्ष नये-नये रोजगार के अवसरों का सृजन किया जा रहा है।
जनसंख्या-
बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रण के प्रभावि उपाये किये जा रहे है। जनता को जागरूक कर परिवार के सदस्यों की संख्या सीमित करने पर बल दिया जा रहा है। सवा हौ करोड़ की जनसंख्या वाला भारत देश दुनियां में सर्वाधिक जनसंख्या के मामले में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है। स्वास्थ्य सेवाओं के सफलत फैलाव से मृत्यु दर में कमी आई है। शिशु जन्म दर में वृद्धि होना भी तेजी से जनसंख्या बढ़ने में सहायक सिद्ध हुआ है। इन सबके बाद भी शिक्षित समाज ने स्वयं निर्णय से हम दो हमारे दो के सिध्दांत का अनुपालन किया है। एक मात्र संतान के युगलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है जो आधुनिक शिक्षित समाज का बेमिशाल और अनुसरणीय उदाहरण है।
शिक्षा-
शिक्षा का स्तर बढ़ते ही नागरिकों ने अपना अच्छा-बुरा जान लिया है। भारत में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के प्रयास सराहनीय है। बेटा और बेटियों को निरंतर शिक्षित करने के प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। बेटो और बेटियों के विवाह की आयु निश्चित कर बाल विवाह को रोक दिया गया है। सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर गरीब परिवारों को मिल रहा है। नागरिकों का जीवन स्तर पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है।
शिक्षित भारत में अब बाल विवाह करना अवैध घोषित है। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक प्रथा को सामान्यतः बहिष्कार किया जा रहा है। सती में प्रथा जैसी कुरीतियां बंद हो चूकी है तथा विधवा विवाह को बढ़ावा दिया जा रहा है। सामाजिक रिश्तों में मधुरता लाने तथा तलाक जैसे गहरा सदमा पहूंचाने वाले कदम को सरकारें हतोत्साहित करने के लिएनित्य नये-नये प्रयास कर रही है। बेटियों के बेटों के समान ही संपत्ति में अधिकार दिये जाना निश्चित किया गया है।
लोक लुभावन जैसे प्रलोभनों (लाॅटरी) आदि को कई राज्यों ने प्रतिबंधित सेवाओं की लिस्ट में डाल रखा है। जुआ खेलना और अवैध नशे को अपराध की संज्ञा भें रखा गया है ताकि छोटे तबके के गरीब लोग अपनी मेहनत के रुपयों को सरलता से व्यय न कर सकें।
संचार क्रांति-
संचार क्रांति ने घर-घर मोबाइल फोन पहूंचा दिया है। भारत के हर में गांव मोबाइल सेवा पहूंची है जिसने सैकड़ों किलोमीटर की दुरियां कम कर दी है। सरकार भी आधुनिक संसाधनों का उचित उपयोग कर नागरिकों को अधिक से अधिक लाभ उपलब्ध कराने में दिन रात लगी। महानगरों में हाई टेक जन असुविधों का जाल बिछता जा रहा है। ग्रामीण सड़कें हाईवे मार्ग से जुड़ी है। गाँव का बड़े शहरों से अब सीधा संपर्क हो गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने गांव-गांव तक सड़कों का जाल बिछाया है। इन्टरनेट सेवा ने जन उपयोगी सुविधाओं को सलर किया है। नागरिक अब घर बैठे विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी सुविधा का लाभ उठा सकते है। बैंकिंग सेवाएं अब मोबाइल पर उपलब्ध है। ऑनलाइन पैसों का ट्रांसफर पहले से अधिक सरल और सुलभ तथा सुरक्षित है। वीडियो काॅल पर देश-विदेश के हाल घर बैठे जान जा सकते है। मौसमी भविष्यवाणी ने भविष्य में उठाये जाने वाले डन हितैषी कदमों को बल दिया है। खेती-बाड़ी में आधुनिई वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर फसलों की पैदावार बढ़ी है। वैज्ञानिक कृषि के फलस्वरूप किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई है। किसानों का जीवन स्तर पहले की मुकाबले अब और भी अधिक बेहतर हुआ है।
मेट्रो ट्रेन एवं रेल परिवहन-
कई बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था को नई पहचान देने वाली मेट्रो ट्रेन सेवा संचालित हो रही है और बहुत से शहरों में जल्दी शुरू होने वाली है। भारत की रेल सेवा दुनियां की शीर्ष रेल सेवाओं में एक है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष चार अरब यात्री भारतीय रेल में सफर करते है। भारतीय रेल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। 'तेजस' और 'वंदे मातरम' ट्रेनें भारतीय अत्याधुनिक ट्रेनों में से एक है।
सड़क यातायात-
भारत में पहले की तुलना में अब सड़कें और भी बेहतर हुई है। संपूर्ण भारत में क्वालिटी युक्त सड़कों का जाल बिछाया गया है। भारत के चार प्रमुख शहरों को छोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना विश्व विख्यात है। प्रतिदिन सैकड़ो किलो मीटर लम्बी सड़कों बनाई जा रही है तथा पुरानी सड़कों पर नियमित पेज़वर्क किया जा रहा है।
भारतीय टेलीविजन-
भारतीय टेलीविजन नित्य नये-नये प्रयोगों के कारण समूचे विश्व में चर्चित है। प्रायोजित कार्यक्रम 'कौन बनेगा करोड़ पति' में अमिताभ बच्चन ने करोड़ो दिल धड़काये है। 'इंडियन आईडियल' की उपज गायिक नेहा ककक्ड़ दुनियां भर में भारत का नाम रोशन कर रही है। अभिनेता सलमान खान द्वारा संचालित 'बिग बाॅस' टीवी शो दुनियां भर में देखे जाने वाला बहुचर्चित टीवी प्रोग्राम है। टीवी सीरियल के माध्यम से भारतीय साहित्य दर्शकों में नैतिकता का प्रचार-प्रसार करने में सहायक सिद्ध हुआ है।
बाॅलीवुड-
टीवी की तरह फिल्मों में भी भारत का बाॅलीवुड चर्चित है। भारत में प्रतिवर्ष सैकड़ो फिल्में बनती है छो देश भर के सिनेमा घरों में दिखाई जाती है। नागरिकों का मनोंरंजन का सबसे सुलभ और सस्ता साधन है सिनेमा। सिनेमा जगत इतना विशाल है कि यहां निर्मित फिल्में दुनियां भर की भाषाओं में रिलीज की जाती है। विदेशों में भारतीय फिल्म बहुत पसंद की जाई है। यही नहीं इन फिल्मो से करोड़ो रुपयों की आमदनी फिल्मकार तथा सरकार को होती है। भारतीय अभिनेता एवं अभिनेत्रियों ने हाॅलीवुड की फिल्मों में काम काम किया है। प्रियंका चौपड़ा, इरफान खान, अनुपम खेर आदि प्रसिद्ध अभिनेता-अभिनेत्रीयो ने विदेशी फिल्मों में काम कर भारत का गौरव बढ़ाया है। क्षेत्रीय भाषा में दक्षिण भारत का साउथ सिनेमा तथा उत्तर भारत का भोजपुरी सिनेमा ने अपनी प्रभावि उपस्थिती दर्ज की है। असंख्य कामगारों को रोजगार देने वाला भारतीय सिनेमा विश्व पटल पर सुविख्यात है। अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, रजनीकांत, माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी जैसे बाॅलीवुड स्टार्स दुनियां भर में भारत देश का नाम रोशन कर रहे है।
खेल-
खेल की दुनियां में भी भारत ने संसाय के सामने नये आदर्श प्रस्तुत किये है। मिल्खा सिंह हो पीटी ऊषा! खेल दौड़ प्रतियोगिता में भारत का नाम रोशन किया है। साइना नेहवाल और सानिया मिर्जा भारत की तेजी से उभरती हुई खिलाड़ी है।
सचिन तेतुंलकर एक ऐसे प्रतिभा शाली खिलाड़ी है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट सौ से अधिक शतक लगाये है। उनकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ी की सरकार को भारत रत्न पुरुस्कार देने संबंधी नियम सचिन तेतुंलकर के लिए संशोधित करने पड़े। भारत रत्न सचिन तेतुंलकर आज भी क्रिकेट के भगवान कहे जाते है। अभिनव बिंद्रा ने ओलम्पिक खेलों में भारत के गोल्ड मैडल जीतकर इतिहास रच दिया।
योग-
योग विधा में भारत देश का कोई सानी नहीं है। भारत की योग पद्धति को विविध रोगों में कारगर स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व स्तर पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बनाने का निर्णय लिया है। भारतीय योग गुरू बाबा रामदेव की योग चिकित्सा का लाभ देश-विदेश के करोड़ों लोग ले रहे है।
अंतरिक्ष विज्ञान-
अंतरिक्ष विज्ञान में भारत अब आत्मनिर्भर है। इतना ही नहीं भारत अपने अंतरिक्ष स्टेशनों से अन्य देशों के यान अंतरिक्ष में स्थापित करने का काम कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष में सैटेलाइट स्थापित कर भारत प्रसारण क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया। भारत की सुरक्षा व्यवस्था में सैटेलाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।
रक्षा क्षेत्र-
पोखरण में परमाणु परिक्षण कर भारत ने समूचे विश्व का ध्यानाकर्षित किया। अनेकों प्रतिबंध सहने के बावजूद भारत परमाणु शक्ति बनने में कामयाब हुआ है। परमाणु बम की ताकत के आधार पर भारत आज महाशक्ति देशों के सामने बड़े गर्व से खड़ा है।
अग्नि, तेजस, पृथ्वी और मिराज जैसी शक्तिशाली मिसाइलें भारत के रक्षा बेड़े में सम्मिलित है जो किसी दुश्मन को छटी का दूध याद दिलाने में समर्थ है।
भारतीय साहित्य-
भारतीय साहित्य साहित्य जगत में जाना पहचाना नाम है। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास या कहानी शायद ही कोई होगा जिसने इन्हें पढ़ा न हो। उनकी ईदगाह कीशकहानी हो या उपन्यास गोदान या गबन हो, हर एक रचना उत्कृष्ट है। इन पर ढेरों टीवी धारावाहिक और फिल्में बनीं जिन्होंने पुरातन भारतीय समाज की यथास्थिति बताई। रूढ़िवादी सोच पर जोर का प्रहार करती मुंशी प्रेमचंद की कहानीं आज भी अजर अमर है।
इसी तरह तुलसी, कबीर, मीरा के दोहे और चौपाइयों ने भक्तिकाल नये आयाम खड़े किये। महादेवी वर्मा, सुर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर जैसे विद्वान साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है। भारतीय साहित्य से प्रेरित कितनी ही फल कहानियों पर फिल्मों का निर्माण हुआ है। और यह अब सतत जारी है। आधुनिक युवा उपन्यासकार चेतन भगत के उपन्यास पर थ्री इडियट, हाफ गर्लफ्रेंड और टू स्टेट जैसी कमर्शियल सक्केस फिल्में बनी है जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
आधुनिक भारत में लेखकों का योगदान-
युवा लेखकों में गज़ब का उत्साह और बेहतर रचनाधर्मीता देखी गयी है। आज का युवा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ संस्पेंस थ्रीलर और फिक्शन कन्टेन्ट लिखने में भी माहिर है। देश की वर्तमान परिस्थितियों पर युवाओं की कलम सटीक बन बैठी है। राजनैतिक तथा सामाजिक परिस्थितियों का आंकलन यथार्थ की चादय ओढ़े हुये है। चेतन भगत व कुमार विश्वास जैसे युवा लेखकों ने समाज में विशेष कर युवाओं को साहित्य के प्रति न केवल जोड़ा अपितु लेखन क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। सामाजिक परिदृश्य को आज का युवा बहुत अच्छे से जानता-समझता है तब ही उसके लेखन में वर्तमान परिस्थितियों की सच्चाई दृष्टिगोचर होती है। युवा लेखकों ने आधुनिक फिल्मों में जमकर कलम चलाई है। युवा गीतकार एवं पटकथा लेखकों की ऊर्जा देखते ही बनती है जो उनके लेखन में झलकती है। युवा लेखक भारतीय समाज के सकारात्मक पक्ष को जहां बेहतर ढंग हे उजागर करने में कामयाब हुआ है वहीं कमी पक्ष पर समालोचनात्म अध्ययन कर सुधारात्मक तथ्य भी उपलब्ध कराता है।
संस्कृति एवं सभ्यता-
भारत में विभिन्न जाति और संप्रदाय के लोग निवास करते है। यहां असंख्य रीति-रीवाज और परम्पराएं प्रचलन में है। पुरे वर्ष तीज-त्यौहारों की धूम रहती है। व्रत-उपवासों के महात्म को स्त्रियों से बेहतर कोई नहीं जान सकता। महात्मा गांधी स्वयं उपवास के प्रबल पक्षधर थे। वे सप्ताह में एक दिन व्रत रखने की सलाह दिया करते थे। यहां होली पर रंगों की रौनक देखते ही बनती है। सात रंगों से आसामना रंगीला हो जाता है। होली पर आपसी रंजिश को खत़्म को मित्रता को स्वीकार करने की प्रभावी रीत है जो सदियों से आज तक प्रभावी है। छोटें-बड़ों का भेद भूलाकर यह त्योहार समानता का प्राचीन काल से आज तक संदेश देता आ रहा है। भक्त प्रहलाद की ईश्वरीय भक्ति और सत्य की विजय के उपलक्ष्य में यह त्यौहार मनाया जाता है। भारत में फसल काटने पर अन्य प्रमुख त्योहार मनाये जाने वाला एक मुख्य त्यौहार है दिपावली। यह त्योहार भगवान श्रीराम के रावण विजय के संदर्भ में संपूर्ण भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। अमावस की काली रात में जलते दियों की रोशनी में सम्पूर्ण भारत जगमगा उठता है। मिठाईयों का आदान-प्रादान होता है। आयु में छोटे उम्रदराज लोगों के पैर छूं चर आशीर्वाद लेते है। आपसी सहयोग और भाईचारे का बेजोड़ उदाहरण है दिपावली का पर्व। यह पर्व व्यापारियों भाईयों के लिए सबसे बड़ा पर्व होता है। इसी पर्व व्यापारी बंधु लेखा-जोखा के दस्तावेज पुजकर बदल देते है। नये खाते शुरू हो जाते है। किसान भाई गोवर्धन पूजा करते हुये गौ धन की पूजा करते है। ग्रामीण जन गांव के लिए सुख समृद्धि की प्रार्थना करते है।
भारतीय संस्कृति की लोकप्रियता इस बात से लगायी जा सकती है अब भारत के प्रमुख त्योहार विदेशों में भी मनाये जाने लगे है। प्रवासी भारतीय अपने-अपने देश में भारत की सभ्यता और संस्कृति को अब जीवित रखे हुये है। होली और दिपवाली की धूम अमेरीका, इंग्लैंड और साऊदी अरब में देखी जाती है।
भारत में धार्मिक पर्व की तरह राष्ट्रीय पर्व भी धूम-धाम से मनाये जाते है। गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस का पर्व संपूर्ण भारतवर्ष एकता और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। भारत में संविधान लागु होने की याद में प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। मुख्य समारोह नई दिल्ली में आयोजित होता है जहां राष्ट्रपति स्वयं अन्य देश के विशिष्ट अतिथि की आगवानी करते है। इस दिन भारतीय सैना की विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। पुरे भारत से सैना के चयनित जवान इस राष्ट्रीय परेड में हिस्सा लेते है। आमंत्रित विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के आतिथ्य में सम्पूर्ण भारत की प्रांतीय झांकियों का जुलुस क्रमशः एक के बाद एक कर निकालता है। भारतीय रक्षा क्षेत्र के अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन किया जाता है। यह दुनिया को भारतीय शक्ति प्रदर्शन का एक माध्यम है।
सप्ताह भर चलने वाले इस गणतंत्र दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न आयोजन आयोजित किये जाते है। भारत के विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा रंजारंग आयोजन किरे जाते है। जिसमें क्षेत्रीय लोकनृत्य, लोकभाषा में गायन आदि प्रमुख होता है। राष्ट्रीय पर्व का अनेक देशों में सीधा प्रसारण किया जाता है। पूरी दुनिया भर में भारत की संपन्नता को देखकर दांतों तले उंगलियाँ दबा लेने पर विवश हो जाती है।
15 अगस्त भारतवर्ष का स्वतंत्रता दिवस है। इस दिन भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते है। तदपश्चात राष्ट को संबोधित करते हुये दूश की प्रगति तथा विकास की योजनाओं की जानकारी देते है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रक्षा, विज्ञान आदि क्षेत्रों में किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी प्रधानमंत्री अपने भाषण में देते है। इस दिन प्रत्येक राज्यों में झंडा वंदन राज्यों के मुख्यमंत्री द्वारा सम्पन्न होता है। प्रत्येक सरकारी कार्यालयों पर ध्वजारोहण के साथ रंगारंग कार्यक्रम किये जाते है। स्कूल-काॅलेजों में उत्सव का वातावरण होता है। बच्चों का उत्साह चरम पर होता है। भारतीय सीमाओं पर सैना के जवान विभिन्न करतब करते हुये राष्ट्रीय पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाते है।
राष्ट्रीय पर्वों को संपूर्ण राष्ट्र मिलजुलकर मनाता है। जिससे अनेकता में एकता के बोध होता है। जो भी पंथ का व्यक्ति या समुदाय विशेष हो, राष्ट्रीय पर्वों को धूम-धाम से मनाते है। यह भारत की प्रचीन एकता और भाईचारे का प्रतिक है।
ग्रामीण भारत-
कृषि प्रधाप देश भारत में 70 प्रतिशत जनसंख्या गांव भें निवास करती है। गांधी कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। भारतीय किसान प्रतिवर्ष विभिन्न फसलों का उत्पादन कर भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते है। फसलों के उत्पादन के विषय में हर राज्य की अपनी एक अलग विशेषता है। जैसे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक सोयबीन की फसल का उत्पादन होता है अतः इसे सोया स्टेट भी कहते है। पंजाब और हरियाणा में गेहूं का बहुतायत में उत्पादन होता है। रवि और खरिब की फसले साल में दो बार बोयी जाती है। कल-कारखानों के लिए कच्चें माल का आपूर्ति भी कृषि से ही की जाती है। शक्कर उद्योग के लिए गन्ने की फसल उगाई जाती है। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गन्ने का उत्पादन होता है। अन्न के साथ तिलहन और दलहन फसलें भी पर्याप्त मात्रा में उगाई जाती है। जिसे क्रमशः खाद्य तेल, अन्य उपयोग के लिए तेल तथा विभिन्न प्रकार की दालें खाद्यान्न के रूप में उपयोग की जाती है।
भारत में विभिन्न तरह की खनिजों का उत्खनन किया जाता है। अभ्रक, ग्रेफाइट, तांबा, स्वर्ण, हीरा इत्यादि बहुउपयोगी खनिज संपदा भारत में बहुतायत में उत्खनन किया जाता है। राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश आदि प्रमुख राज्यों में अमूल्य खनिज संपदा के वृहद भंडार पाये जाते है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में हीरो की खदाने है।
ग्रामीण भारत की कल्पना मात्र से शांति प्रिय जीवन के विभिन्न दृश्यगोचर होने लगते है। भारतीय गांवों में हरियाली और खुशहाली के साथ शांति युक्त वातावरण की झलक देखने को मिलती है। तीज-त्यौहारों में एकता कक मिशाल गावों में ही मिलती है। पुरा गाँव मिलकर एक स्थान पर इकट्ठा होकर होली जलाते है तथा अगले दिन हिल-मिलकर होली का पर्व मनाते है। पिछड़े आदीवासी भाई-बहन के लोकगीत और लोकनृत्य बरबस ही सेनानियों का ध्यानाकर्षित कर लेते है। भांति-भांति तरह की बोलियों में परस्पर प्रेम और अपनापन झलकता है। सभी ग्रामीण एक-दूसरे के सहयोगी बनते है। विपन्नता में भी सम्पन्नता के दर्शन भारत के गांवो में होते है।
ग्रामीण हांट बाजार-
भारत के विभिन्न गांवों में प्रतिमाह अथवा साप्ताहिक हांट-बाजार का आयोजन होता है। इन लघु बाजारों में ग्रामीण जमकर खरीदी करते है। दैनिक उपयोग की वस्तुएँ ये लोग क्रय कर घय ले जाते है। आज भी कहीं कहीं वस्तु विनिमय के दृश्य दूखने को मिलते है। ग्रामीण गेहूं या सोयाबीन के बदले दुकानदारों हे अपने उपयोग के चीज़े उक्त के बदले में जाते है। भगोरिया जैसे पारंपरिक आयोजन भी ग्रामीण हांट-बाजारों में ही किये जाते है। जिसमे संजे-धंजे और नाचते गाते ग्रामीण हांट बाजारों में प्रवेश करते है। होली के पर्व के पुर्व मनाया जाने वाला यह पर्व प्रेम प्रस्ताव देकर युवक द्वारा युवति को अपने साथ अन्यत्र भगाकर ले जाने तथा परस्पर विवाह करने के उद्देश्य हेतु मनाया जाता है। युवति आसानी से युवक के साथ नहीं जाती। वह युवक को मारती-पीटती है किन्तु युवक सब कुछ सहते हुये युवती को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार कर लेता है तब गांव वाले मिलकर युवक और युवती की शादी कर देते है। इससे होली का उत्साह और भी बढ़ जाता है। नाचते-गाते ग्रामीण लोकगीतों में विभिन्न रीति-रिवाजों को व्यक्त करते है।
भगोरिया जैसे ग्रामीण उत्सव देखने विदेशी पर्यटक बड़ी मात्रा में आते है। वे गाव वालों के रंग में रंगकर उनके उत्सव में सम्मिलित हो जाते है। इतना ही नहीं भारत के कई गांवों में ऐसे ही अनेक क्षेत्रिय आयोजन की गूंज विदेशों में देखी और सुनी जाती है। हर साल प्रतिवर्ष भारतीय गावों का भ्रमण बड़ी मात्रा पर्यटकों द्वारा किया जाता है। इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का संचयन होता है। ग्रामीण हांट-बाजारों में पहले से अधिक सुविधाएं बढ़ी है तथापि प्राचीन धरोहर के रूप में जैसी है वैसी ही संरक्षण रखने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है।
लघु एवं कुटीर उद्योग-
भारत के ग्रामीण वातावरण में कूटीर उद्योग का प्रचलनन आधुनिक भारत में भी बरकरार है। लुघ वनोपज से निर्मित स्वदेशी वस्तुओं की बाज़ारों में वृहद मांग आज भी बनी हुई है। कुटीर उद्योग ग्रामीणों की आय का अच्छा स्त्रोत है। खेती-किसानों के साथ-साथ ग्रामीण कूटीर उद्योग में विभिन्न घर उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करते है। शहर के बड़े बाजारों में कूटीर उद्योग निर्मित वस्तुएं विक्रय हेतु उपलब्ध होती है। ये वस्तुएं अपेक्षाकृत सस्ती एवं अधिक समय तक टिकाऊ होते है।
राज्य सरकार तथा केन्द्रीय सरकार लघु एवं कुटीर उद्योगों को संरक्षण प्रदान कर रही है। सहकारी संस्थाएं भी कुटीर उद्योगों को ॠण उपलब्ध कराती है जिससे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है। कुटीर उद्योग निर्मित वस्तुएं को विक्रय हेतु अनेक बाजार उपलब्ध कराने का कार्य सरकारें कर रही है। ग्रामीण को जीवन स्तर पहले से अधिक ऊँचा उठा है।
मेले-
भारतीय परिवेश की एक ओर विशेषता है यहां आयोजित होने वाले विभिन्न मेले। प्रतिवर्ष अनेक प्रांतों में विभिन्न अवसरों पर मेले आयोजित होते है। बड़ी संख्या जन समुदाय इन पारंपरिक मेलों में पहूंचते है। मेलों में विभिन्न दुकानों पर तरह-तरह की वस्तुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है। पारंपरिक परिधान एवं आभूषणों के मिलने का उचित स्थान मेला स्थल होता है। तरह-तरह के झूलों में झूलते लोग खुशियाँ मनाते है। जन मानस में मेलों के प्रति अति उत्साह देखा जाता है।
कुंभ, सिंहस्थ और पुष्कर जैसे वृहद मेलों जग प्रसिद्ध है। इन मेलों में सम्मिलित होने करोड़ देशी-विदेशी पर्यटक आते है। भारतीय मेलों से प्रेरित होकर अत्याधुनिक मेलों का आयोजन अब शहरों में भी होने लगा है। अप्पू घर जैसे आधुनिक मेलों ने शहरों में अचूक प्रसिद्धी को हासिल किया है। सरकारें निरंतर मेलों का अस्तित्व बचाये रखने के प्रयत्नशील है। इसके लिए मेला समितियों का गठन किया जाता है जिसमें प्रशासनिक अमला और क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक सम्मिलित होकर मेले का समुचित आयोजन एवं प्रबंधन करते है। जिससे मेले में सम्मिलित हो रहे कासी भी दुकानदार आदि को कोई परेशानी न हो। आधुनिक मेलों में पधारे पर्यटकों की सुख-सुविधाओं का भी पर्याप्त ध्यान रखा जाता है।
भारत: विश्व गुरू-
भारत के उच्च आदर्श पहले भी अनुकरणीय थे और अब भी है। विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने हमेशा से दुनियां को रास्ता दिखाई है।
आयुर्वेद-
आज भारतीय आयुर्वेद को संपूर्ण विश्व अपना रहा है। भारत कि आयुर्वेद पद्धति में अन्य को साइडिफिकेट नहीं होते, रह कारण भी है इसका अति प्रसिद्ध होने का। पुरातन भारतीय ॠषि मुनि रोगों के उपचार में आयुर्वेदिक प्रणाली उपयोग करते थे। यह अत्यंत प्रभावी है। इतना ही नहीं आयुर्वेद पद्धति में शल्य क्रिया का भी प्रचलनन है। गंभीर से गंभीर रोगों का उपचार आयुर्वेद में है। यह प्रभावी होकर अपेक्षाकृत सस्ता और सुलभ है। जंगली जड़ी-बूटियों में अनोखे लाभदायक चमत्कारीक गुण है, जिनसे दवाईयों का निर्माण होता है। ये आयुर्वेदिक दवाईयां विभिन्न रोगों के उपचार में कारगर सिद्ध होता है।
योग: कर्मसु कौशलम्-
योग: कर्मसु कौशलम्। अर्थात 'कर्म में कुशलता ही योग है'। आज भारत में उपजे योग को सारी दुनिया अपना रही है। यह भारत की योग विधा का ही कमाल है जो प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूम में सारे विश्व मे मनाया जाता है। योग दिवस को लेकर पुरी दुनियां में खासा उत्साह देखा जाता है। जल थल और नभ में योग करते हुये लोगों को देखा जाता है।
अकेता में एकता-
भारत में अनेक जाति और धर्म के लोग निवास करते है। सभी समुदायों की पृथक-पृथक सभ्यता और संस्कृति है। लोक भाषा में महान अंतर होने के बाद भी यहां के लोगों में कमाल की एकता है। जब भी देश ने संकट का सामना किया भारतीयों ने आगे बढ़कर एकता के साथ समस्त संकटों का मिलजुल न केवल सामना किया अपितु विजय भी हासिल किया।
अतिथि देवो भवः -
ये भारतीयों की उच्च संस्कृति ही है जो अतिथि को देवों के समान स्वीकारते है। भारतीय स्वयं भूखें रहकर अतिथी को पेटभर भोजन करवाने में जग विख्यात है। न केवल घर आने वाला अतिथि अपितु विदेशों से देश में आना वाला हर पर्यटक अतिथि और भगवान के समान है। पर्यटन मंत्रालय ने इसी भावना को अंगीकार करते हुये अपने हर विदेशी पर्यटक को विशेष सुविधाएं देने हेतु प्रतिबद्ध नज़र आता है।
आस्था-
भारत के निवासीयों की आस्था प्रंशसनीय है। ईश्वर के प्रति अगाध आस्था भारत में ही देखी जाती है। नर को नारायण के समान पूजे जाने की परंपरागत व्यवस्था है। नदियों को माता और पत्थर को भगवान की तरह आराधना की जाती है। वन देवता और पर्वत को गोवर्धन भगवान के समान पूजना प्रकृति पूजा का अनुठा उदाहरण है। इसी तरह भारत में गाय भी माता के समान आराध्य है। गौ मुत्र तथा गौ अवशिष्ट गोबर पवित्रता के सूचक अवयय स्वीकार किये जाते है जिससे के छिड़काव से घर-आंगन पवित्र हो जाता है। गंगा और नर्मदा नदि के जल को घरूलू समस्त शुभ आयोजनों में उपयोग किया जाता है। कहावत है की पवित्र जल के छिड़काव से सभी व्यवधान समाप्त होकर कार्य सफल होता है। ध्यान-भजन में भक्त इस कदर भाव विभोर हो जाते है कि उन्हें कोई सुद-बुध नहीं रहती। भारत के मथुरा वृन्दावन के भजन कीर्तन इतने विख्यात है कि दुनिया भर के अनुयायी भगवान कृष्ण के भक्त बनकर यही रच बस जये है। वे पूर्ण आनन्द के साथ ईश्वर की भक्ति करते है जो अपने आप में भारत के धार्मिक मतों का समुचित अनुठा उदाहरण है।
लोक संस्कृति-
भारतीय परिवेश की लोक संस्कृति सचमुच में अनुकरणीय है। यहां के लोकगीत का प्रचलनन अब फिल्मों में फिल्माया जाने लगा है। फिल्मों के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति की झलक दुनियां देख रही है। भारतीय लोक संस्कृति को करीब से देखने हजारों विदेशी पर्यटक प्रतिवर्ष भारत आते है। भारतीय विश्वविद्यालय में परम्परागत भारतीय लोक भाषा और संस्कृति को विभिन्न पाठ्यक्रमों के माध्यम से पढ़ाया जाता है। भारतीय विद्यार्थीयों के सैकड़ो विदेशी विद्यार्थी भी यहां लोक भाषा एवं संस्कृति का अध्ययन करते है।
ऐतिहासिक विरासत-
समृद्ध साहित्य-
धार्मिक ग्रंथ- भारतीय धर्मं ग्रंथों का संकलन विशाल है। पुरातन ॠषियों ने ईश्वरीय आदर्शों का संचयन ग्रंथों में किया है जिन्हें पढ़कर भारतीय सदियों से लाभांवित हो रहे है। चार वेदों का उत्कृष्ट सृजन भारत के पास है। ॠग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में मानव की समस्त क्रियाकलापों तथा समस्याओं का विस्तार से हल बताया गया है। स्वामी दयानंद ने भारतीयों को नारा दिया था- वेदों की ओर लौटो। दयानंद ने वेदों का अध्ययन कर पाया कि मानव की सभ्यता और संस्कृति वेदों में परिलक्षित है। व्यक्ति को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के वेदों का अध्ययन आवश्यक है। भारतीय धर्मं ग्रंथों में रामायण व श्रीमद्भागवत प्रमुख स्थान रखते है जिसमें भगवान विष्णु के अवतार द्वार धर्म की स्थापना के लिए अधर्म का नाश किया है। इन धर्म ग्रन्थों की प्रसिद्धी और लोकप्रियता के कारण ही इन पर रामयण और महाभारत जैसे अविस्मरणीय टीवी धारावाहिक बनाये गये। इन टीवी सीरियल्स ने भारतीयों में सनातन धर्म के प्रति अगाध आस्था का विकास किया। बच्चों से लेकर बढ़ो ने धार्मिक टीवी सिरीयल्स न केवल देखे अपितु प्रस्तुत आदर्शों को ग्रहण भी किया। आधुनिक कम्प्यूटरीकरण के युग में बच्चों में प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति का समूचित बोध कराने के उद्देश्य से एनीमेशन (कार्टून) धारावाहिक बनाये जा रहे है जिन्हें बच्चों ने बहुत पसंद किया। 'ओ माय फ्रेण्ड गणेशा' व 'हनुमान' एनीमेटेड फिल्मों को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। इन फिल्मों ने विदेशी दर्शकों को आकर्षित किया है।
गुरूकुल शिक्षा व्यवस्था- प्राचीन गुरूकुल शिक्षण व्यवस्था से प्रेरित होकर आधुनिक बोर्डिंग आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे है। जिनमें विद्यार्थी आवास सुविधा का लाभ लेकर शिक्षा ग्रहण करते है। बच्चों को उच्च आदर्श प्रदान करने का समुचित प्रबंध किया जाता है।
आश्रम व्यवस्था-
वैदिक काल में आश्रम व्यवस्था का चलन था। जिसमें व्यक्ति की आयु सौ वर्ष मानकर यथोचित चार प्रकार के कर्तव्य निश्चित किये गये थे। जन्म से लेकर पच्चीस वर्ष तक की आयु बह्रचर्य आश्रम का समय निश्चित किया गया था। जिसमें विद्याध्यन करते हुये व्यक्ति को ब्रहचर्य पालन आवश्यक था। पच्चीस वर्ष से पचास वर्ष तक की आयु का समय ग्रहस्थ आश्रम के लिए निर्धारित था। इसका पालन कर व्यक्ति विवाह आदि कर संतान उत्पत्ति तथा अन्य ग्रहस्थ संस्कार करता था। पचास वर्ष से लेकर पिच्चहत्तर वर्ष की आयु सन्यास आश्रम के लिए समर्पित था। जिसमें मानव को ग्रहस्थ आश्रम के सभी दायित्वों से सन्यास लेना आवश्यक था। इस सम वह ईश्वरीय भक्ति करता है। पिच्चहत्तहर वर्ष से सौ वर्ष की आयु वानप्रस्थ आश्रम के लिए निर्धारित थी। इसमें सन्यासी सबकुछ छोड़कर मृत्यु पर्यंत वन में निवास करता है।
आश्रम व्यवस्था उचित कर्तव्य बोध के लिए विश्व भर में विख्यात है। जो वर्तमान में भारतीय समाज को उच्च आदर्श के प्रति निष्ठावान बनाती है।
सामुदायिक सहयोग-
भारत के विभिन्न पंथ तथा समुदाय प्रथम दृष्टी में अलग-अलग अवश्य दिखाई देते है किन्तु जनमानस की भलाई के लिए एक उद्देश्य के साथ कार्य करने में सदैव एकजूट दिखाई देते है। बाढ़, सूखा, भुकंप आदि के प्रभाव से विशाल मात्रा में जन-धन की अपार हानी होती है। इस समय भारत के समस्त समुदाय एक होकर प्राणी मात्र के लिए सेवा भाव से समर्पित हो जाते है। प्रत्येक समुदाय मानव कल्याण के लिए तन-मन और धन से समर्पित हो जाता है।
भारत विभिन्न विभिन्नता लिए हुये भी एकता के सुत्र में पिरोया हुआ तेजी से आत्मनिर्भर होता हुआ विकासशील देश है। आने वाले कुछ सालों में भारत न केवल भारतीयों को अपितु विश्व का मार्गदर्शन करता हुआ नज़र आयेगा। विश्व पटल पर भारत की उपस्थिति आज आवश्यक है। समस्त वैश्विक जन हितैषी निर्णयों में भारत की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता की मांग जोर पकड़ती जा रही है। आने वाला समय युवा भारत और भारतीयों का होगा इसमें कोई संदेह नहीं है। टाटा, बिरला और अम्बानी समूह जैसे धन कुबेर भारत की के पास है जो निरंतर तरक्क़ी के नये पढ़ाव पार करते हुये भारत को महाशक्ति बनाने में दिन-रात प्रयासरत है। भारतीय स्टेट बैंक भारत का सबसे बड़ा बैंक होकर विश्व भर में अपनी सेवायें दे रहा है। भारतीय रेल नेटवर्क दुनियां का दुसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय सैना दुनियां की चौथे नम्बर की सबसे अच्छी सैना है। इतना ही नहीं भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी हे ऊभरती हुथे अर्थव्यवस्था बन गयी। यह विश्व में पांचवे नम्बर पर पहूंच गयी है। जापान, जर्मनी जैसे आधुनिक द्श भारत में निवेश करने पर राजी हुये है। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुम्बई से अहमदाबाद के लिए शुरू होगी। यह अपने आप में भारत की शक्तिशाली अर्थव्यवस्था का परिचायक है। दुनिया भर के व्यवसायी भारत आकर व्यापार करना चाहते है। भारत से बहुतायत में वस्तुओं का आयात-निर्यात किया जाता है। वायु सेवा एवं जल परिवहन में भी भारत आत्मनिर्भर हुआ है। भारत की सभ्यता और संस्कृति विदेशों को लुभाने में सफल हुई है। यहां के लोक गायक और नर्तक विदेशी धरती पर देशी धुनों पर नाचते-गाते नज़र आते है। विदेशों में भारतीयों को बहुत ही सम्मान की दृष्टी से देखा जाने लगा है। यह भारत के साथ भारतीयों के लिए भी गर्व की बात है। भारतीय साहित्य और धर्मं ग्रंथो पर विदेशों में पढ़ाई की जाना लगी है। जर्मनी में भारत की संस्कृत भाषा को बहुत सी कक्षाओं में अनिवार्य किया गया है।
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