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Showing posts from April, 2021

लेख-तारक मेहता का उल्टा चश्मा

 *लेख* *एकता और भाईचारे की मिशाल-* *तारक मेहता का उल्टा चश्मा*            *तारक* मेहता का उल्टा चश्मा! एक ऐसा धारावाहिक जो रामानंद सागर कृत रामायण और बी आर चौपड़ा की महाभारत के बाद सबसे अधिक देखा और पसंद किया जाने वाला टीवी सीरीयल कहा जा सकता है। तारक मेहता का उल्टा चश्मा की नायिका छरहरी काया की छोटे कपड़े पहनने वाली तेज-तरार मुहंफट युवती नहीं है। जैसा आम सीरियल में होता है। दया बेन समाज की उस भोली-भाली बहू का प्रतिनिधित्व करती है जिसे हम अक्सर अपने आसपास देख सकते है। परमार्थ की भावना से परिपूर्ण दया बेन लटके-झटके नहीं दिखाती। वरन अपने गुजराती संस्कार पर गर्व करते हुये सादा जीवन जीते हुये नित्य नये आदर्श प्रस्तुत करती है। तारक मेहता का उल्टा का नायक जेठालाल गढ़ा, कोई सिक्स पैक वाला गबरू जवान नहीं है। वह तो कद में छोटा और मोटा है। उसके चेहरे पर कोई विशेष तेज नहीं है वरन चार्ली चैंपियन की तरह बहुत छोटी मूंछ है। जिसे देखकर बरबस ही हंसी आ जाती है। जेठालाल की मुसीबतों में फंसने की कहानियां नई नहीं है। वे तो दर्शकों ने बहुत बार देखी-सुनी तथा आजमाई हुई है, स्...

इंदौरी- व्यंग्य

       *इंदौरी-व्यंग्य*        *हमारे* इंदौर में तो इतने जागरूक लोग पाये जाते है कि यदि एम वाए अस्पताल में किसी मरीज से मिलने गये तो स्वयं से कहते है- 'जब एमवाए आ ही ग्या है तो अपणा भी चेकअप करई ला।' पांच रूपये की पर्ची पर पूरे पांच सौ रूपयू की दवाई मुफ्त में लेते आयेंगे। डाॅक्टर को झूठ-झूठ बोलकर फ्री में जांचें लिखवा लेंगे और इसके बाद बोलेंगे- 'डाॅक्टर साबह! म्हारें बड़े छोरा के खुजली चली री है। उके लाने भी दवाई दी दो।' हमारे इंदौरी डाॅक्टर बुरा नहीं मानते और मरीज को दवा दे देते है। कुछ इंदौरी तो इतने महान है, जो दिन भर कुछ नहीं करते लेकिन जरा भर काम का बोलो तो कहते है-'टाइम नी है अपने पास!' अच्छा यह वही लोग है जो दिनभर भोजन- भंडारें की तलाश में मोहल्लें-मोहल्लें भटकेगें और पहले स्वयं भरपेट जीमेंगे, जेब में जहां-जहां रखने की जगह होगी भोजन के पैकेट ठूंस लेंगे। घर लौटते ही सबसे पहले भोजन के पैकेट सुरक्षित रखकर मोहल्ले के अन्य घरों में डोंढी पीट देंगे की फलां जगह भोजन के पैकेट बंट रहे है। एहसान जताना भी नहीं भूलेंगे। कहेंगे-'म्हारे जैसे ही पतो चलियो...