लेख-तारक मेहता का उल्टा चश्मा
*लेख*
*एकता और भाईचारे की मिशाल-*
*तारक मेहता का उल्टा चश्मा*
*तारक* मेहता का उल्टा चश्मा! एक ऐसा धारावाहिक जो रामानंद सागर कृत रामायण और बी आर चौपड़ा की महाभारत के बाद सबसे अधिक देखा और पसंद किया जाने वाला टीवी सीरीयल कहा जा सकता है। तारक मेहता का उल्टा चश्मा की नायिका छरहरी काया की छोटे कपड़े पहनने वाली तेज-तरार मुहंफट युवती नहीं है। जैसा आम सीरियल में होता है। दया बेन समाज की उस भोली-भाली बहू का प्रतिनिधित्व करती है जिसे हम अक्सर अपने आसपास देख सकते है। परमार्थ की भावना से परिपूर्ण दया बेन लटके-झटके नहीं दिखाती। वरन अपने गुजराती संस्कार पर गर्व करते हुये सादा जीवन जीते हुये नित्य नये आदर्श प्रस्तुत करती है। तारक मेहता का उल्टा का नायक जेठालाल गढ़ा, कोई सिक्स पैक वाला गबरू जवान नहीं है। वह तो कद में छोटा और मोटा है। उसके चेहरे पर कोई विशेष तेज नहीं है वरन चार्ली चैंपियन की तरह बहुत छोटी मूंछ है। जिसे देखकर बरबस ही हंसी आ जाती है। जेठालाल की मुसीबतों में फंसने की कहानियां नई नहीं है। वे तो दर्शकों ने बहुत बार देखी-सुनी तथा आजमाई हुई है, स्वयं पर! दैनिक उलझनों में उलझा जेठालाल देर-सवेर इन मुसीबतों से बाहर आ ही जाता है। और यह सब होता जेठालाल के फियरबिग्रेड दोस्त तारक मेहता की मदद से। लेखक तारक मेहता सदैव अपने मित्र जेठालाल की मदद को तैयार दिखते है तो वहीं अंजली मेहता के डायड फूड से परेशान भी रहते है। जेठालाल अपने पिता चम्पकलाल गढ़ा का सपूत बेटा है। अपने पिता की वह कोई बात नहीं टालता। चम्पकलाल स्वयं अपने आप में एक लघु विद्यालय है जो नैतिक शिक्षा और अपने अनुभवों के बल पर बिगड़ैल से बिगड़ैल चरित्र को दुरूस्त करने की योग्यता रखते हैं। टिपेन्द्र उर्फ टप्पू की शरारतें बिल्कुल वैसी ही है जैसी हम सभी ने अपने-अपने मोहल्लों में कभी न कभी की है। आत्माराम तुकाराम भिड़े का टप्पू की शिकायतें लाना और फिर टप्पू के पिता जैठालाल और आत्माराम भिड़े की तीखी नोंक-झोंक घर के बच्चों तक को भांती है। माधवी भिड़े सर्वशांती की बेमिशाल महिला है। माधवी भाभी टप्पू या जेठालाल से पुर्व अपने पति आत्माराम को समझाने में विश्वासा रखती है। टप्पू सैना की मेम्बर सोनू भिड़े और टप्पू की दोस्ती भी आत्माराम भिड़े को पसंद नहीं है। इस पर भी जब तब माहौल गर्मा जाता है। वरिष्ठ युवा कुंवारे पत्रकार पोपटलाल भी आत्माराम भिड़े से जब-तब भिड़ जाते है। तूफानी बातों से दुबले-पलते पोपटलाल जब दुनियां हिलाने की बात करते है तब दर्शक ठहाके मारकर हंस पड़ते है। छाते में पोपटलाल की जान बसती है। एक बार तो इन्होंने अपने छाते का जन्मदिन तक मनाया था। पोपटलाल का एक ही सपना है कि जल्दी से जल्दी उनकी शादी हो जाएं। मिस्टर एण्ड मिसेस अय्यर सी विंग गोकुलधाम के स्थाई रहवासी है। मिस्टर अय्यर, जेठालाल के एक और प्रतिद्वंद्वी है। दोनों में छत्तीस का आकड़ा है। इसका एक कारण यह भी है कि अय्यर साहब की बहुत ही खुबसूरत पत्नी बबीता जी पर जेठालाल लट्टू है। खाने-पीने के शौकिन हंसराज हाथी और उनके सुपुत्र गोली के लिए तरह-तरह के व्यंजन परोसना वाली मिसेस कोमल हाथी खुशमिज़ाज और दोस्ताना प्रवृत्ति की महिला है। वे अपने पति के मोटापा से चिंतित भी है तथा चाहती है कि हंसराज हाथी दुबले-पतले हो जाएं। जोशीले अंदाज में सभी का दिल जीतने वाले रोशन सिह सोढ़ी गोकुलथाम सोसाइटी के सुपरमेन है। हर किसी की मदद को चौबीसों घंटें तैयार। हां! रोशन सिह सोढ़ी पार्टी-शार्टी के लिए भी हमेशा तैयार नज़र आते है। गैराज मैकेनिक रोशन सिंह सोढ़ी की पार्टी-शार्टी के बाद दो ही कमजोरी है- एक उनका बेटा गोगी और दूसरा उनकी धर्म पत्नी रोशन। तीनों खुलकर और बड़े ही आनन्द से रहते है। टपू सेना का एक और मेम्बर है पींकू! जिसके माता-पिता धारावाहिक में नहीं बताये गये किन्तु वह अन्य टप्पू सैना के साथ हंसी-खुशी रहता है।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक इसलिए भी आकर्षक बन पड़ा है क्योंकी इसमें सास-बहू की किटपिट नहीं है। टाइटल सांग में सास का नाम भर सुनने को मिलता है किन्तु कोई सास नामक चरित्र धारावाहिक में कभी देखने को नहीं मिला। तारक मेहता का उल्टा चश्मा की प्रसिद्धि का दूसरा कारण यह भी है कि इसमें भारतीय संस्कृति और रीति रिवाजों को एकता और परस्पर प्रेम के साथ मनाया जाता है। यहां हर त्यौहार एक उत्सव कि तरह होता है। यथास्थिति में त्यौहार की रौनक कम हुई है किन्तु तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक देखकर कभी नहीं लगा कि हमारे त्यौहारों की रौनक कभी फिकी हुई है।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक के पात्रों की नोंक-झोंक और हंसी-ठिठोली हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद है। घर के बच्चें भी कार्टून के साथ-साथ तारक मेहता का उल्टा देखना पसंद करते है। यह धारावाहिक इतना लोकप्रिय है कि पुराने एपिसोड भी लोग बड़े चाव से देखते है। मोबाइल पर लाखों दर्शकों की पहली पसंद है तारक मेहता का उल्टा चश्मा। नये एपीसोड से बढ़कर पुराने एपिसोड ज्यादा तर देखे जा रहे है। 2008 से आरंभ यह धारावाहिक नित्य नये कीर्तिमान खड़े कर रहा है। धारावाहिक ने तेरह साल में तीन हजार एपीसोड का रिकार्ड बनाया है। इसकी लोकप्रियता कभी कम नहीं होगी क्योंकी यह धारावाहिक दर्शकों की भावनाओं से जुड़ा है। भारतीय संस्कृति धारावाहिक की आत्मा है जो इसे सदैव अजर-अमर और सजीव बनायें रखेगी। तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक की सफलता के पीछे धारावाहिक के पात्रों ने भी जमकर मेहनत की है जो कार्यक्रम में दिखती भी है।
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लेखक
जितेन्द्र शिवहरे
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मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश मोबाइल नम्बर
8770870151
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