कवि का शुभकामना संदेश

         *कवि का शुभकामना संदेश-व्यंग्य*


   *शादी* की रिशेप्सन पार्टी के दौरान स्टेज पर खड़े दुल्हा-दुल्हन को बधाई देने एक कवि मित्र पहूंचे। दुल्हे मित्र के कंधे पर हाथ रखकर कवि जी बोले- "होनी को कोन टाल सकता है मित्र! किन्तु तुम ध्यैर्य से काम लेना। अब तक तुमने पढ़ाई और नौकरी आदि के लिए जो संघर्ष किया है वो तो नाम मात्र का था। तुम्हारा वास्तविक संघर्ष तो अब शुरू होता है। मैं ईश्वर से तुम्हारी सलामती के लिए प्रार्थना करूंगा। ईश्वर तुम्हारी रक्षा करें।"

कवि मित्र का गला भर आया। उनके चेहरे की रूआंसी में उनके निजी अनुभव साफ देखे जा सकते थे। वे दुल्हन से कुछ न बोले। बस हाथ जोड़कर कुछ पल दुल्हन के सम्मुख खड़े रहे। मानो जैसे आंखों में नीर भरकर अपने प्रिय दुल्हे मित्र पर कृपा बनायें रखने की अपील कर रहे हो। स्टेज से उतरकर वे सीधे साऊण्ड सिस्टम वाले के पास जा पहूंचे। न जाने कवि जी ने उसके कान में क्या कहा, जिसे सुनकर वह घबरा गया और ना-नुकर करने लगा। कवि मित्र कहां मानने वाले थे। जेब से मोबाइल निकाला और साऊण्ड सिस्टम से अटेच कर दिया। फिर जो गीत बजा उसने उपस्थित सभी मेहमानों के रौंगटें खड़े कर दिये। कुछ पलों के लिए हर कोई शांत और चुपचाप खड़ा था। गीत की महत्ता और तात्कालिक आयोजन मे गीत की प्रासंगिकता इसी बात से जाहिर हो रही थी कि महिलाओं को छोड़कर किसी ने गीत का विरोध नहीं किया। अपितु जब तक गीत बजा, लोगों ने बहुत ही सहानुभूति पुर्वक सुना। उपस्थित महिलाओं ने त्वरित गीत बंद करवाया। गीत बंद होते ही जैसे सभी वशीकरण भंग हुआ गया हो, सभी पूर्ववत हो गये। अब आपकी जिज्ञासा गीत के बोल जानने की हो रही होगी। बताये देता हूं। कवि मित्र ने गीत बजाया था- "ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुये है उनकी, जरा याद करो कुर्बानी....!" कुछ लोग कवि मित्र को अब भी खोज रहे थे किन्तु कवि जी वहां से फरार हो चूके थे क्योंकि कुछ लोग जो वास्तव में मातृ शक्तियां थी बड़ी बेताबी से उन्हें ही ढूंढ रहीं थीं।


समाप्त


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